रमजान को रमदान क्यों कहते हैं, बहुत ही कम लोग जानते होंगे इसके पीछे का कारण ?

रमज़ान का महीना करीब आने पर हमारे मन में सहरी और अफ्तार की याद आने लगती है. हम सब यह जानने के लिए बेताब रहते हैं कि आखिर ये रमज़ान कब से शुरू होंगे. क्योंकि चांद देखने के बाद रमज़ान की शुरुआत होती है। मु’स्लि’म कैलेंडर के अनुसार रमजान साल का नौवां महीना होता है। शा’बा’न के बाद और ई’द-उल-फ़ि’त्र से ठीक पहले वाला महीना होता है। ये वही ई’द है जिस पर शीरखुरमा बनाया जाता है, सि’वै’यां बनायीं जाती हैं।

110 RAW ideas | stock photos, image, cool photosदुनिया भर के मु’स्लि’म स’मु’दा’य के लोग रमजान में महिने में रोज़ा रखते हैं। यानी सूरज निकलने के कुछ मिनटों के पहले से लेकर शाम को सूरज के छिपने तक कुछ नहीं खाते-पीते। वैसे तो इस महिने को लेकर हमारे मन में बहुत सारे सवाल होंगे, मगर यहां पर हम आपको इस महीने को लेकर कुछ मुख्य सवालों के जवाब दे रहे हैं जो किसी के भी मन में खड़े हो सकते हैं।

रमज़ान को सही मायने में क्या कहते हैं, रमज़ान या रमदान?
पिछले कुछ सालों से लोग सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हो गए हैं। जैसे ही रमज़ान शुरू होता है तो लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद देने लगते हैं। कोई लिखता है रमदान मुबारक तो कोई लिखता है रमज़ान मुबारक.अब लोगों में इसी बात को लेकर ब’हस छिड़ गई है कि ये रमज़ान है या रमादान?

रमजान की सच्चाई
असल में रमादान अरबी लफ्ज़ है, जबकि रमज़ान उर्दू का लफ्ज़। रमदान और रमज़ान के फर्क के पीछे यह कहानी बताई जाती है कि अरबी भाषा में ‘ज़्वा’द’ अक्षर का स्वर अंग्रेज़ी के ‘ज़े’ड’ के बदले ‘डी’एच’ की संयुक्त ध्वनि होता है। इसीलिए इसे अरबी में रमादान कहा जाता हैं।
लेकिन इस त’र्क से सभी मु’स्लि’म स्कॉ’ल’र इ’त्ते’फा’क नहीं रखते हैं और कहते हैं जब रमज़ान, रमदान है तो फिर रोज़े को ‘रो’दे’ और ज़मीन को द’मी’न ही कहेना चाहिए, मगर अगर ऐसा बोला गया तो कोई भी उसे तो’त’ला समझेगा।

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